राजस्थान : सड़कें ही बनीं, बाकी कुछ नहीं मिला
बारां से. हाड़ौती क्षेत्र का बारां जिला कृषि उत्पादकता के मामले में पंजाब को मात देता है, लेकिन विकास की बात यहां बेमानी है। किशनगंज और शहबाद की करीब 90 हजार की आबादी के लिए दो वक्त की रोटी जुटाना मुश्किल है। सहरिया जनजाति के लोग सरकार से हर महीने मुफ्त मिलने वाले 35 किलो गेहूं और जंगली कंदमूल खाकर जीवन गुजारने को मजबूर हैं।बारां के ग्रामीण इलाकों में प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के जरिए सड़कें तो बनी हैं, लेकिन बाकी कुछ नहीं हो पाया।
पींजना गांव के लालाराम पटेल ने बताया कि न तो पीने का पानी है और न ही रोजगार। नरेगा से भी राहत नहीं मिली। 1800 की आबादी वाले गांव मंे अब बमुश्किल 150 लोग ही बचे हैं। बाकी लोग रोजगार की तलाश में बाहर चले गए। गांव के गोपाल, जगन्नाथ, पूरन, तीरथ और भैरूलाल ने बताया कि नरेगा में काम नहीं मिल रहा है। जिन्हें मिला भी है उन्हें पूरे 100 दिन का काम नहीं मिला।
हरिनगर, चौराखाडी, बीलखेड़ा माल, बीलखेड़ा डाम, कस्बा नूनेरा, सनवाड़ा के ग्रामीणों ने बताया कि गरीब होने के बावजूद उनके राशनकार्ड नहीं बन पा रहे हैं। इससे योजनाआंे का लाभ उन तक नहीं पहुंच रहा है।
जानकारों का कहना है कि बारां जिला भविष्य में पावर हब
बन सकता है। अंता में गैस आधारित बिजली प्लांट और छबड़ा में थर्मल पावर स्टेशन पहले से हैं। छबड़ा में छह इकाइयां और बननी हैं। निजी कंपनियांे ने प्रस्ताव दिए हैं। कृषि उपज अच्छी होने से प्रसंस्करण उद्योग में भी काफी संभावनाएं हैं।
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